चंद्रयान 3 की,आज 23 अगस्त 2023 शाम 6 बजकर 5 मिनिट पर सफल सॉफ्ट लेंडिंग, जाने चंद्रयान 3 की अब तक की कहानी.

चंद्रयान 3 की लैंडिंग को अब बस कुछ ही समय बाकी है. इसकी सक्सेसफुल लैंडिंग की संभावना आज है. आज, 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 05 मिनट पर चंद्रयान की सॉफ्ट लैंडिंग

चंद्रयान -3 की,आज 23 जुलाई शाम 6 बजकर 5 मिनिट पर सॉफ्ट लेंडिंग
चंद्रयान 3 की,आज 23 अगस्त 2023 शाम 6 बजकर 5 मिनिट पर सफल सॉफ्ट लेंडिंग, जाने चंद्रयान 3 की अब तक की कहानी. 1

आप चंद्रयान की लैंडिंग को कई प्लेटफॉर्म पर लाइव देख सकते हैं. लेकिन आपके मन में सवाल होगा कि फिलहाल चंद्रयान 3 कहां है. अंतरिक्ष में किस तरफ जा रहा है. इसरो के बेंगलुरु स्थिति इसरो टेलिमेट्री, ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क

देश के वैज्ञानिकों का हौसला और दिन-रात की कड़ी मेहनत का नतीजा ही है कि भारत एक बार फिर चांद पर तिरंगा फहराने से बस चंद कदम दूर है. इसरो के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और तकनीशियनों ने चंद्रयान-3 मिशन में दिन-रात काम किया. उनकी जिंदगी मून मिशन के इर्द-गिर्द घूमती रही. आइए जानते हैं इस मून मिशन के प्रमुख चेहरे कौन-कौन हैं

चंद्रयान 3
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मिशन मून

दरअसल, चंद्रयान-2 को लगभग चार साल पहले 22 जुलाई 2019 को चंद्रमा की ओर भेजा गया था, लेकिन 02 सितंबर को चांद की ध्रूवीय कक्षा में चांद का चक्कर लगाते समय लैंडर ‘विक्रम’ अलग हो गया और सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर लैंडर का स्पेस सेंटर से संपर्क टूट गया

बुधवार शाम 6.05 बजे लैंडर विक्रम लैंड करेगा. लैंडिंग के साथ ही लैंडर विक्रम अपना काम शुरू कर देगा. लैंडर विक्रम की सॉफ्ट लैंडिंग सफल रही तो रैंप के जरिए छह पहियों वाला प्रज्ञान रोवर बाहर आएगा और इसरो से कमांड मिलते ही चांद की सतह पर चलेगा. यह 500 मीटर तक के इलाके में चहलकदमी कर पानी और वहां के वातावरण के बारे में इसरो को बताएगा.

शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा. इसरो ने लैंड कराने की तैयारी शुरू कर दी है. सबसे पहले ऑटोमैटिक लैंडिंग सीक्वेंस शुरू किया जाएगा. हालांकि, अभी लैंडर मॉड्यूल के निर्धारित जगह पर पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है. इसके 5.44 बजे तक पहुंचने की उम्मीद है चंद्रयान -3 की,आज 23 जुलाई शाम 6 बजकर 5 मिनिट पर सॉफ्ट लेंडिंग

शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा की सतह पर
चंद्रयान 3 की,आज 23 अगस्त 2023 शाम 6 बजकर 5 मिनिट पर सफल सॉफ्ट लेंडिंग, जाने चंद्रयान 3 की अब तक की कहानी. 3

दरअसल, चंद्रयान-2 को लगभग चार साल पहले 22 जुलाई 2019 को चंद्रमा की ओर भेजा गया था, लेकिन 02 सितंबर को चांद की ध्रूवीय कक्षा में चांद का चक्कर लगाते समय लैंडर ‘विक्रम’ अलग हो गया और सतह से 2.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर लैंडर का स्पेस सेंटर से संपर्क टूट गया

MCU DCA AND PGDCA RESULT DECLARE : आज माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के DCA (डीसीए) और PGDCA (पीजीडीसीए) कंप्यूटर कोर्स के परीक्षा परिणाम घोषित हुए।

ये दोनों इसरो के लिए रॉकेट प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए जिम्मेदार प्राथमिक केंद्र है. उनके मार्गदर्शन में, चंद्रयान -3, आदित्य-एल 1 (सूर्य का अध्ययन करने के लिए एक मिशन), और गगनयान (भारत का पहला मानव मिशन) की देखरेख की जा रही है. एस सोमनाथ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बेंगलुरु से पढ़ाई की है
चंद्रयान-3 मिशन में डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ कल्पना नारी शक्ति का प्रतीक बनी हैं. कोरोना महामारी के दौरान भी उन्होंने मून मिशन का सपना नहीं छोड़ा, वे बीते चार साल से दिन-रात इसी मिशन को जी रही हैं

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चंद्रयान 3 के इंतजार पूरा भारत ही नही , पूरी दुनिया कर रही है

चंद्रयान-3 मिशन को लेकर पूरी दुनिया टकटकी लगाए बैठी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान ने एक नया वीडियो पोस्ट कर मिशन को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। एजेंसी ने बताया कि मिशन तय समय पर है।

चंद्रयान-3 आज शाम चंद्रमा की सतह पर ‘साफ्ट लैंडिंग’ करेगा। पूरी दुनिया इस पल का इंतजार कर रही है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे इस ऐतिहासिक पल का लाइव प्रसारण देख पाएंगे? तो आइए आपको बताते हैं कि इसकी लैंडिंग का सीधा प्रसारण आप कैसे, कब और कहां देख सकते हैं

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  • पहला चरण : इस चरण में यान की सतह से 30 किमी की दूरी को घटा कर 7.5 किमी पर लाया जाएगा।
  • दूसरा चरण : इसमें सतह से दूरी 6.8 किमी तक लाई जाएगी। इस चरण तक यान का वेग 350 मीटर प्रति सेकंड रह जाएगा, यानी शुरुआत से करीब साढ़े चार गुना कम।
  • तीसरा चरण : इसमें यान को चंद्र सतह से महज 800 मीटर की ऊंचाई तक लाया जाएगा। यहां से दो थ्रस्टर इंजन उसे उतारेंगे। इस चरण में यान का वेग शून्य प्रतिशत सेकंड के बेहद करीब पहुंच जाएगा।
  • चौथा चरण : इस चरण में यान को सतह के 150 मीटर करीब तक लाया जाएगा। इसे वर्टिकल डिसेंट कहते हैं, यानी खड़ी लैंडिंग।
  • पांचवां चरण : इस चरण में यान में लगे सेंसर और कैमरा से मिल रहे लाइव इनपुट को पहले से स्टोर किए गए रेफरेंस डाटा से मिलाया जाएगा। इस डाटा में 3,900 तस्वीरें भी शामिल हैं, जो चंद्रयान 3 के उतरने वाली जगह की हैं। इस तुलना से निर्णय होगा कि चंद्र सतह से ऊपर जहां लैंडर स्थित है, वहां से उसे सीधे सतह पर उतारें तो लैंडिंग सही रहेगी या नहीं। अगर ऐसा लगा कि लैंडिंग की जगह अनुकूल नहीं है, तो वह थोड़ा दाईं ओर या बाईं ओर मुड़ेगा। इस चरण में यान चंद्र सतह के 60 मीटर तक करीब पहुंचाया जाएगा।
  • छठा चरण : यह लैंडिंग का आखिरी चरण है, इसमें लैंडर को सीधे चंद्र सतह पर उतार दिया जाएगा।
चंद्रयान 3 के इंतजार पूरा भारत ही नही , पूरी दुनिया कर रही है
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चांद पर उतरने के बाद

इसके बाद 23 अगस्त को शाम 6 बजकर 4 मिनट पर सॉफ्ट लैंडिंग कराने की कोशिश की जाएगी. इस लैंडर मॉड्यूल के ऐतिहासिक पलों का LIVE Telecast होगा. मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग के बाद लैंडर विक्रम से रोवर प्रज्ञान को बाहर निकाला जाएगा. रोवर चांद की सतह पर चलेगा और आगे का काम शुरू होगा

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एक लूनर डे 14 दिनों का होता है. रोवर ISRO के लिए चांद पर कई तरह के वैज्ञानिक परीक्षण करेगा, इससे चांद पर मौजूद कई गहरे राज भी खुल सतके हैं

चंद्रयान 3 के इंतजार पूरा भारत ही नही , पूरी दुनिया कर रही है
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चंद्रयान 3 के इंतजार पूरा भारत ही नही , पूरी दुनिया कर रही है

चंद्रयान यान को पृथ्वी की कक्षा से ऊपर उठाकर चंद्रमा की ओर बढ़ाने की प्रक्रिया आज तड़के अंजाम दी गई। इससे चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर ‘ट्रांसलूनर’ कक्षा में चला गया और चंद्रमा की कक्षा की ओर बढ़ने लगा है। उसे चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने में करीब पांच दिन लगेंगे।

चंद्रयान 1,चंद्रयान 2, की विफलता से कई सिख इसरो को मिली

2009 में पूरी तरह से ऑपरेशनल हुआ था. तब से लेकर आज तक ऐसा नहीं हुआ कि ह्यूस्टन से उसका संपर्क टूटा हो. नासा के मुख्यालय में बिजली का बैकअप है. पूरा का पूरा बैकअप कंट्रोल सिस्टम है ताकि करीब 450 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगा रहे स्पेस स्टेशन पर मौजूद एस्ट्रोनॉट्स से संपर्क साधा जा सके.

स्पेस एजेंसियों ने सीधे चंद्रमा की ओर अपने रॉकेट के जरिए स्पेसक्राफ्ट भेजा. उन्हें निराशा ज्यादा मिली है. तीन मिशन में एक फेल हुआ. लेकिन इसरो ने जो रास्ता और तरीका चुना है, उसमें फेल होने की आशंका बेहद कम है. यहां दोबारा मिशन पूरा करने का चांस है

चंद्रयान यान को पृथ्वी की कक्षा से ऊपर उठाकर चंद्रमा की ओर बढ़ाने की प्रक्रिया आज तड़के अंजाम दी गई। इससे चंद्रयान-3 पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलकर ‘ट्रांसलूनर’ कक्षा में चला गया और चंद्रमा की कक्षा की ओर बढ़ने लगा है। उसे चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने में करीब पांच दिन लगेंगे।

चंद्रयान-3 की पहली चाँद पर तस्वीर / Chandrayaan-3 ki pahli chand par tasvir

चंद्रयान-3 की गति को करीब 7200 से 3500 किलोमीटर प्रतिघंटा के बीच करनी होगी 5 से लेकर 23 अगस्त तक चंद्रयान की स्पीड लगातार कम होती जा रही है. चांद के गुरुत्वाकर्षण 5 से लेकर 23 अगस्त तक शक्ति के हिसाब से फिलहाल चंद्रयान की गति ज्यादा है. चंद्रयान-3 की गति को कम करके 2 या 1 किलोमीटर प्रति सेकेंड पर लाना होगा. यानी 7200 या 3600 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार. इस गति पर ही चंद्रयान-3 चंद्रमा के ऑर्बिट को पकड़ेगा. फिर धीरे-धीरे उसके दक्षिणी ध्रुव के पास पर लैंड कराया जाएगा

ग्रैविटी पृथ्वी से 6 गुना कम है. इसलिए चंद्रयान-3 की गति कम करनी होगी. नहीं हुई तो चांद से आगे निकल जाएगा चंद्रयान-3. ऐसा नहीं होगा. असल में चंद्रयान-3 इस समय 288 x 369328 किलोमीटर की ट्रांस लूनर ट्रैजेक्टरी में यात्रा कर रहा है. अगर यह चांद का ऑर्बिट नहीं पकड़ पाता है, तो 230 घंटे बाद यह धरती के पांचवी कक्षा वाले ऑर्बिट में वापस आ जाएगा इसरो वैज्ञानिक एक और प्रयास करके इसे वापस चंद्रमा पर भेज सकेंगे.

लोगों में यह जानने की खासी उत्सुकता है कि वह कहां तक पहुंचा. छोटी से छोटी जानकारी लोग चंद्रयान-3 के बारे में जानना चाहते हैं. लेकिन आज की रात चंद्रयान-3 के लिए बेहद महत्वपूर्ण है

वह अंतरिक्ष में एक लंबी छलांग लगाने जा रहा है. चंद्रयान-3 एक अगस्त को रात में 12 से 1 बजे के बीच धरती की कक्षा से निकलकर चांद की ओर कदम बढ़ा देगा. चांद की कक्षा तक पहुंचने में चंद्रयान-3 को महज 6 दिन का वक्त लगेगा. फिलहाल इसरो आज आधी रात को चंद्रयान-3 की मैनुअर यानी प्रक्रिया को पूरा करेगा, जिसमें 28 से 31 मिनट का समय लगेगा.

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